मंगली से शादी


वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से मंगलीक दोष केवल एक भय का विषय नहीं, बल्कि गहन विश्लेषण का विषय है। कालपुरुष सिद्धान्त के अनुसार लग्न को देह, चंद्रमा को मन, शुक्र को दाम्पत्य सुख तथा मंगल को ऊर्जा, साहस और कामभाव का कारक माना गया है। मंगल अग्नि तत्व प्रधान ग्रह है, जो जहाँ एक ओर व्यक्ति को पराक्रम, आत्मबल और ऊँचाइयों तक पहुँचने की क्षमता देता है, वहीं अशुभ स्थिति में यह क्रोध, आवेग, दुर्घटना और वैवाहिक तनाव का कारण भी बन सकता है। इसलिए विवाह के संदर्भ में मंगल की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक माना गया है।

शास्त्रों जैसे बृहत्पाराशर होरा, भावदीपिका, मानसागरी और जातक पारिजात के अनुसार जब जन्मकुंडली के लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित होता है, तब मंगलीक दोष उत्पन्न होता है। इन भावों में स्थित मंगल अपनी विशेष दृष्टियों (चतुर्थ, सप्तम और अष्टम) के माध्यम से दाम्पत्य जीवन, जीवनसाथी के स्वास्थ्य और पारिवारिक सुखों को प्रभावित करता है। उदाहरणतः लग्न में मंगल होने पर सप्तम भाव प्रभावित होता है, जिससे वैवाहिक जीवन में संघर्ष की संभावना बढ़ती है; द्वितीय भाव में मंगल पारिवारिक कलह का कारण बन सकता है; चतुर्थ में होने पर गृहस्थ सुख में बाधा आती है; अष्टम में आयु और गुप्त कष्टों का संकेत देता है तथा द्वादश में शारीरिक एवं शैय्या सुख में कमी ला सकता है।

मांगलिक दोष का मूल अर्थ यह है कि मंगल की तीव्र अग्नि ऊर्जा यदि संतुलित न हो तो वह संबंधों में उग्रता, असंतोष और टकराव पैदा कर सकती है। यदि कुंडली में अन्य पाप ग्रह जैसे शनि, राहु, केतु या सूर्य भी सप्तम भाव या सप्तमेश को प्रभावित करते हों, या मंगल-केतु की युति, शनि की दृष्टि, कालसर्प दोष, अथवा वज्र, शूल, व्यातिपात जैसे अशुभ योग उपस्थित हों, तो दाम्पत्य जीवन में चुनौतियाँ और अधिक बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में मानसिक असंतुलन, यौन असंतुष्टि, वैचारिक मतभेद और कभी-कभी संबंध-विच्छेद तक की संभावना बनती है।

किन्तु यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि प्रत्येक मंगलीक कुंडली अशुभ ही हो, ऐसा अनिवार्य नहीं है। यदि मंगल शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, उच्च राशि में स्थित हो, या दोनों पक्ष (वर-वधू) मंगलीक हों, तो यह दोष काफी हद तक शान्त या निरस्त हो जाता है। अतः वैदिक ज्योतिष में मंगलीक दोष को अंतिम निर्णय नहीं, बल्कि एक संकेत के रूप में देखा जाता है, जिसका संतुलन उचित मिलान, उपाय और समझदारी से किया जा सकता है।

श्री वैदिक ज्योतिष 

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