गुण मिलान होने पर भी वैवाहिक जीवन सफल क्यों नहीं होता?
हिंदू वैदिक संस्कृति में कुंडली मिलान (अष्टकूट मिलान) को वैवाहिक जीवन की नींव माना गया है। अक्सर समाज में यह धारणा देखने को मिलती है कि यदि वर और वधू के 36 में से 27, 30 या 36 गुण मिल गए, तो विवाह सफल ही होगा। लेकिन व्यावहारिक जीवन में कई बार इसके विपरीत परिणाम देखने को मिलते हैं—32-34 गुण मिलने के बावजूद रिश्तों में दरार आ जाती है, मानसिक तनाव उत्पन्न होता है और बात तलाक तक पहुँच जाती है। यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि केवल गुण मिलान (अष्टकूट मिलान) विवाह की सफलता की 100% गारंटी नहीं है। आइए इसके कारणों और एक कुशल ज्योतिषी द्वारा किए जाने वाले समग्र विश्लेषण को विस्तार से समझें। 1. केवल 'गुण मिलान' असफल क्यों सिद्ध होता है? अष्टकूट मिलान पद्धति (36 गुण) मुख्य रूप से चंद्रमा की स्थिति और नक्षत्रों पर आधारित होती है। * चंद्रमा की सीमित भूमिका: चंद्रमा केवल व्यक्ति के मन और सोच के एक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। यह मिलान यह बताता है कि दोनों के नक्षत्रों का आपस में तालमेल कैसा है, लेकिन यह संपूर्ण व्यक्तित्व, आय, स्वास्थ्य, आयु या वैवाहिक आयु का निर्णय नहीं करता। ...