ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी ने बड़े सलीके से
हमें थका दिया,
चलते-चलते रुकने का
तरीक़ा सिखा दिया।
जो सोचा था,
वो मिला नहीं कभी,
जो मिला,
उसके बारे में सोचा नहीं था।
ज़िन्दगी सवाल कम,
जवाब ज़्यादा देती है,
बस शर्त इतनी है
कि पूछना आना चाहिए।
हर दिन थोड़ा-सा
हमसे कुछ ले जाती है,
और बदले में
सब्र छोड़ जाती है।
ज़िन्दगी से कोई गिला नहीं,
बस इतना सा अफ़सोस है—
जो समझ में आई,
वो गुज़र चुकी थी।
आर्यमौलिक
Comments